Saturday, August 27, 2011

उसकी यादें

क्यो ये नींद आती है,
क्यो फिर याद आती है,
क्यो मन कही न लगता है फिर,
क्यो फिर बाहै खुल युँ ही जाती है,
भरने को उसे बाहों मैं,
ना दूर जाने को फिर कभी,
बस मैं और वो,
और वो वादियाँ प्यार की,
जो है कहती कि प्यार कर,
लाख दूर जाकर भी,
उसी गुलिस्ता से,
उनही बहारो से,
उनही मदहोश घटा​ओ से,
बस उनही से,
सिर्फ़ उनही से,
जिसका नाम एक नज़्म है,
एक गज़ल है,
जिसकी खुस्बु बागों को महका देती है,
भवरौं को मचला देती है,
कलिओ को खिला देती है,
यादो को जनम देती है,
और फिर,
वो और उसकी यादें,
बस उसकी यादें,
वो प्यारी सी यादें,
मन को रुलाती उसकी यादें,
सासों को तडपाती उसकी यादे,
मेरी और उसकी वो यादें,
जिनको मैं चाहता हूँ,
ना कभी भूलाना,
छिपा लेना चाहता हूँ,
अपने दिल के उस कोने मे,
जहाँ बसती हैं,
बस उसकी और मेरी यादें,
मेरी यादें,
उसकी यादें ॥

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