Saturday, August 27, 2011

वो

वो उलझे हुए से बाल,
वो आखें मुरझाई सी ।
कपडे अस्त व्यस्त से,
जैसे नीदं अभी आयी सी ॥

वो रजाई की गरमी बहकी सी,
वो सर्द हवाओ की बेवफ़ाई सी ।
याद है सोने से पहले,
मुम्मी ने लोरी सुनाई सी ॥

वो लोरी की प्यारी सी बतिया,
वो कहानी लगी थी मन भाई सी ।
वो किस्से थे जो कहानी मै,
वो हकीकत में सपनो मे आयी सी ॥

वो प्यारी सी दुनिया सपनो की,
वो आखों मे छिपी जादुगरी ।
वो रात की मम्मी के हाथो की सिरहन,
सुबह तक सिर के बालो से आयी सी ॥

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