Thursday, November 9, 2017

अपनी 'दिल्ली' मुरझा रही है

दिल्ली
खो सी गयी है इस धुएं में,
सुना है आज-कल,
उसकी चीखे सुनाई देती है,
अपनी साँसों को दबाकर,
धड़कनो को बढाकर,
अपनी उम्र बढ़ने की कोशिश,
कर रही है अपनी दिल्ली |

चिमनियों से निकलता दानव,
वाहनों का वो काला जहरीला साँप,
आज की आधुनिकता का तांडव,
निगलने को तैयार बैठा है,
सुना है,
जब दिया बुझने वाला हो,
तो लौ बढ़ जाती है,

कहीं ये मंजर वो ही तो नहीं,
लगता है अपनी 'दिल्ली' मुरझा रही है |
















Friday, April 12, 2013

Vo din beet gaye


Hae itne din beet gaye...
Hae kitne din beet gaye...
Achae se ek sath baithe...
Achae se kuch pal baithe...
Do do aankho ko char kiyae...
Bin kuch bolae izhar kiyae...
Din raato ki na parwah kiyae...
Na ek duze ko sarokar kiyae..
Hae kitnae din beet gaye..
Haa itnae din hae beet gaye...

"Vo din to bus beet gaye" -Amit

Ye Itni Doori

Kyo ye neend meri mujhko, aise satati hae, tarsaati hae...
Aankhae band kartae hi, teri surat kyo nazar aati hae...
..


"Ye itni doori" -Amit

Thursday, September 27, 2012

सपने उनके

नींद हमारी सपने उनके,
लगता ये ही प्यारा है ।
क्या है जीना, क्या है मरना,
सब उनके बिन बेकारा है ॥

Monday, August 29, 2011

निदियाँ

चल अलबेली सो जा अब,
मिठी प्यारी निदियाँ मैं ।
जाकर सपने ले लेना तू,
दिल की प्यारी नगरिया में ॥

देर बहुत हो चुकी हें अब तो,
अब सो जा बातें करेगें कल ।
सपनो में अब भी आउगा तेरे,
साथ रहूगां लेकिन हर पल ॥

Saturday, August 27, 2011

उसकी यादें

क्यो ये नींद आती है,
क्यो फिर याद आती है,
क्यो मन कही न लगता है फिर,
क्यो फिर बाहै खुल युँ ही जाती है,
भरने को उसे बाहों मैं,
ना दूर जाने को फिर कभी,
बस मैं और वो,
और वो वादियाँ प्यार की,
जो है कहती कि प्यार कर,
लाख दूर जाकर भी,
उसी गुलिस्ता से,
उनही बहारो से,
उनही मदहोश घटा​ओ से,
बस उनही से,
सिर्फ़ उनही से,
जिसका नाम एक नज़्म है,
एक गज़ल है,
जिसकी खुस्बु बागों को महका देती है,
भवरौं को मचला देती है,
कलिओ को खिला देती है,
यादो को जनम देती है,
और फिर,
वो और उसकी यादें,
बस उसकी यादें,
वो प्यारी सी यादें,
मन को रुलाती उसकी यादें,
सासों को तडपाती उसकी यादे,
मेरी और उसकी वो यादें,
जिनको मैं चाहता हूँ,
ना कभी भूलाना,
छिपा लेना चाहता हूँ,
अपने दिल के उस कोने मे,
जहाँ बसती हैं,
बस उसकी और मेरी यादें,
मेरी यादें,
उसकी यादें ॥

वो

वो उलझे हुए से बाल,
वो आखें मुरझाई सी ।
कपडे अस्त व्यस्त से,
जैसे नीदं अभी आयी सी ॥

वो रजाई की गरमी बहकी सी,
वो सर्द हवाओ की बेवफ़ाई सी ।
याद है सोने से पहले,
मुम्मी ने लोरी सुनाई सी ॥

वो लोरी की प्यारी सी बतिया,
वो कहानी लगी थी मन भाई सी ।
वो किस्से थे जो कहानी मै,
वो हकीकत में सपनो मे आयी सी ॥

वो प्यारी सी दुनिया सपनो की,
वो आखों मे छिपी जादुगरी ।
वो रात की मम्मी के हाथो की सिरहन,
सुबह तक सिर के बालो से आयी सी ॥