दिल्ली
खो सी गयी है इस धुएं में,
सुना है आज-कल,
उसकी चीखे सुनाई देती है,
अपनी साँसों को दबाकर,
धड़कनो को बढाकर,
अपनी उम्र बढ़ने की कोशिश,
कर रही है अपनी दिल्ली |
चिमनियों से निकलता दानव,
वाहनों का वो काला जहरीला साँप,
आज की आधुनिकता का तांडव,
निगलने को तैयार बैठा है,
सुना है,
जब दिया बुझने वाला हो,
तो लौ बढ़ जाती है,
कहीं ये मंजर वो ही तो नहीं,
लगता है अपनी 'दिल्ली' मुरझा रही है |
खो सी गयी है इस धुएं में,
सुना है आज-कल,
उसकी चीखे सुनाई देती है,
अपनी साँसों को दबाकर,
धड़कनो को बढाकर,
अपनी उम्र बढ़ने की कोशिश,
कर रही है अपनी दिल्ली |
चिमनियों से निकलता दानव,
वाहनों का वो काला जहरीला साँप,
आज की आधुनिकता का तांडव,
निगलने को तैयार बैठा है,
सुना है,
जब दिया बुझने वाला हो,
तो लौ बढ़ जाती है,
कहीं ये मंजर वो ही तो नहीं,
लगता है अपनी 'दिल्ली' मुरझा रही है |